अपना पोलिंग बूथ जानने के लिए electoralsearch.eci.gov.in पर अपने EPIC नंबर से सर्च करें। नतीजे में आपके पोलिंग स्टेशन का नाम और पता, भाग संख्या और वोटर लिस्ट में आपकी क्रम संख्या दिख जाएगी। यही जानकारी ECINET ऐप, वोटर हेल्पलाइन 1950 और आपके BLO से भी मिल सकती है।
चुनाव के दिन सबसे ज़्यादा परेशानी उन लोगों को होती है जो मानकर चलते हैं कि बूथ वही होगा जहां पिछली बार वोट डाला था। फिर वे एक स्कूल से दूसरे स्कूल भटकते रहते हैं। इस बार यह गलती और भारी पड़ सकती है, क्योंकि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में मतदाता सूची नए सिरे से बनी है और बहुत से लोगों के बूथ बदले हैं। इस लेख में बूथ पता करने के सभी तरीके और बूथ के अंदर वोट डालने की पूरी प्रक्रिया बताई गई है।
पोलिंग बूथ, पोलिंग स्टेशन और भाग संख्या: फर्क समझें
ये तीन शब्द अक्सर एक-दूसरे की जगह इस्तेमाल होते हैं, इसलिए पहले इनका मतलब साफ़ कर लें:
| शब्द | मतलब |
|---|---|
| मतदान परिसर (Polling Location) | वह इमारत, जैसे कोई स्कूल या पंचायत भवन, जहां एक या ज़्यादा बूथ होते हैं |
| पोलिंग स्टेशन / बूथ | उस इमारत का वह कमरा जहां आपके हिस्से के लोग वोट डालते हैं |
| भाग संख्या (Part No.) | मतदाता सूची का वह हिस्सा जो एक बूथ से जुड़ा है |
| क्रम संख्या (Serial No.) | उस भाग की सूची में आपका नंबर |
एक ही स्कूल में तीन-चार बूथ हो सकते हैं। इसलिए सिर्फ़ स्कूल का नाम जानना काफी नहीं है, यह भी जानना ज़रूरी है कि आपका बूथ कौन-सा कमरा या कौन-सा नंबर है।
इस बार आपका बूथ बदला हो सकता है, क्यों?
- SIR के बाद नई सूची: यूपी में 10 अप्रैल 2026 और उत्तराखंड में 3 अक्टूबर 2026 को SIR के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी हुई। सूची दोबारा बनने से कई लोगों का भाग और बूथ बदल गया।
- बूथों का बंटवारा: चुनाव आयोग ने 2025 में तय किया कि किसी भी पोलिंग स्टेशन पर 1,200 से ज़्यादा मतदाता नहीं होंगे। जिन बूथों पर इससे ज़्यादा मतदाता थे, वहां नए बूथ बनाए गए।
- पता बदलवाया हो: अगर आपने फॉर्म 8 से पता बदलवाया है, तो आपका बूथ भी बदल गया होगा।
इसलिए चाहे आप हर चुनाव में वोट डालते रहे हों, इस बार बूथ एक बार ज़रूर चेक करें।
तरीका 1: वेबसाइट से बूथ पता करें (EPIC नंबर से)
- मोबाइल या कंप्यूटर पर electoralsearch.eci.gov.in खोलें।
- “Search by EPIC” टैब चुनें।
- भाषा चुनें, अपना EPIC नंबर डालें और राज्य चुनें।
- कैप्चा भरकर “Search” पर क्लिक करें।
- नतीजे में “Polling Station” के आगे आपके बूथ का नाम और पता लिखा होगा।
- यहीं आपकी भाग संख्या (Part No.) और क्रम संख्या (Serial No.) भी होगी। इनका स्क्रीनशॉट ले लें या कागज़ पर लिख लें।
तरीका 2: नाम और पते से बूथ पता करें
वोटर कार्ड या EPIC नंबर पास नहीं है, तो:
- उसी वेबसाइट पर “Search by Details” टैब चुनें।
- अपना नाम, पिता/पति का नाम, उम्र या जन्म तिथि, लिंग, राज्य, ज़िला और विधानसभा क्षेत्र भरें।
- कैप्चा भरकर सर्च करें।
- नतीजे में आपका बूथ, भाग संख्या और क्रम संख्या दिख जाएगी।
नाम नहीं मिल रहा, तो सरनेम हटाकर या हिंदी-अंग्रेज़ी बदलकर दोबारा खोजें। फिर भी न मिले, तो हो सकता है कि आपका नाम सूची में न हो। इसके लिए यह लेख पढ़ें: [internal link: वोटर लिस्ट में नाम कैसे चेक करें]
तरीका 3: मोबाइल नंबर से
अगर आपका मोबाइल नंबर वोटर रिकॉर्ड से जुड़ा है, तो “Search by Mobile” टैब में नंबर और OTP डालकर भी बूथ की जानकारी देख सकते हैं।
तरीका 4: ECINET ऐप से
- चुनाव आयोग का आधिकारिक ECINET ऐप डाउनलोड करें और मोबाइल नंबर से लॉगिन करें।
- “Search Your Name in Voter List” से अपना नाम खोजें।
- आपके रिकॉर्ड में पोलिंग स्टेशन की जानकारी दिखेगी।
ECINET ऐप में बूथ से जुड़ी और सुविधाएं भी हैं, जैसे अपने BLO से कॉल बुक करना और दिव्यांग मतदाताओं के लिए सहायता मांगना।
तरीका 5: कॉल करके या BLO से
- वोटर हेल्पलाइन 1950: अपने ज़िले का STD कोड लगाकर 1950 पर कॉल करें और EPIC नंबर बताएं।
- टोल-फ्री नंबर: 1800-11-1950।
- BLO: आपके इलाके का बूथ लेवल ऑफिसर अपने बूथ की पूरी जानकारी रखता है। उनसे सीधे पूछ सकते हैं।
बूथ ढूंढने के व्यावहारिक सुझाव
ऑनलाइन बूथ का नाम मिल जाना एक बात है, और मतदान के दिन वहां सही कमरे तक पहुंचना दूसरी। ये छोटे सुझाव काम आएंगे:
- एक दिन पहले जाकर देख आएं: खास तौर पर अगर बूथ नया है या किसी ऐसे स्कूल में है जहां आप पहले नहीं गए। इससे मतदान के दिन भटकना नहीं पड़ेगा।
- स्कूल का पूरा नाम लिखें: कई गांवों और मोहल्लों में “प्राथमिक विद्यालय” एक से ज़्यादा होते हैं। ऑनलाइन दिखे पूरे नाम और कमरे/भाग की जानकारी के साथ जाएं।
- शहरों में: बड़ी कॉलोनियों में एक ही इमारत में कई बूथ होते हैं। प्रवेश द्वार पर आम तौर पर भाग संख्या के हिसाब से बूथ की सूची लगी होती है, वहां अपनी भाग संख्या देखें।
- गांवों में: BLO और प्रधान को आम तौर पर पता होता है कि किस मोहल्ले का बूथ कहां है। शक हो तो उनसे पूछ लें।
- मतदाता सहायता केंद्र: कई मतदान परिसरों के बाहर मतदाता सहायता केंद्र (Voter Assistance Booth) बनाए जाते हैं, जहां कर्मचारी सूची देखकर आपकी भाग संख्या और कमरा बताते हैं।
- परिवार के साथ जा रहे हैं तो: सबकी भाग संख्या अलग से नोट करें। हो सकता है एक ही परिसर में सबके बूथ अलग कमरों में हों।
EVM और VVPAT: एक मिनट में समझें
पहली बार वोट डालने वाले अक्सर मशीन को लेकर घबराते हैं। असल में यह बहुत आसान है।
| मशीन | कहां होती है | क्या करती है |
|---|---|---|
| कंट्रोल यूनिट | मतदान अधिकारी के पास | अधिकारी इससे आपके लिए बैलेट यूनिट चालू करते हैं |
| बैलेट यूनिट | वोटिंग कंपार्टमेंट के अंदर | इसमें उम्मीदवारों के नाम, चुनाव चिन्ह और नीले बटन होते हैं |
| VVPAT | बैलेट यूनिट के बगल में | आपके वोट की पर्ची कुछ सेकंड के लिए खिड़की में दिखाती है |
आपको सिर्फ़ इतना करना है: अपने उम्मीदवार के सामने वाला नीला बटन एक बार दबाएं, VVPAT की खिड़की में पर्ची देखें और बीप की आवाज़ सुनें। बटन बार-बार दबाने से कुछ नहीं होता, आपका वोट पहली बार दबाने पर ही दर्ज हो जाता है।
वोटर स्लिप (मतदाता सूचना पर्ची) क्या है और कैसे मिलती है?
मतदान से कुछ दिन पहले BLO घर-घर जाकर मतदाता सूचना पर्ची (Voter Information Slip) बांटते हैं। इस पर्ची में आम तौर पर ये जानकारी होती है:
- आपका नाम
- विधानसभा क्षेत्र
- भाग संख्या और क्रम संख्या
- पोलिंग स्टेशन का नाम
- मतदान की तारीख और समय
पर्ची न मिले तो घबराएं नहीं। ऊपर बताए किसी भी तरीके से यही जानकारी खुद देख लें।
ज़रूरी बात: मतदाता सूचना पर्ची पहचान पत्र नहीं है। बूथ पर पहचान के लिए वोटर कार्ड, e-EPIC का प्रिंट, या चुनाव आयोग के मान्य 12 फोटो पहचान पत्रों में से कोई एक दिखाना होगा। [internal link: वोटर आईडी के बिना वोट कैसे डालें]
मतदान केंद्र के बाहर पार्टियों के बूथ
मतदान के दिन कई बार राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता मेज़ लगाकर अपनी तरफ से पर्ची देते हैं। चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक ऐसे बूथ मतदान केंद्र से 100 मीटर की दूरी के बाहर ही लगाए जा सकते हैं। आयोग की आधिकारिक पर्ची या खुद ऑनलाइन देखी गई जानकारी पर ही भरोसा करें।
वोटिंग के दिन साथ क्या ले जाएं
| ले जाएं | न ले जाएं |
|---|---|
| वोटर कार्ड, e-EPIC का प्रिंट या कोई मान्य फोटो पहचान पत्र (ओरिजिनल) | मोबाइल फोन (बूथ के अंदर अनुमति नहीं) |
| भाग संख्या और क्रम संख्या लिखी पर्ची | कैमरा या रिकॉर्डिंग का कोई उपकरण |
| मतदाता सूचना पर्ची (अगर मिली है) | किसी पार्टी का चुनाव चिन्ह वाला सामान |
| ज़रूरी दवाई, पानी (बुज़ुर्गों के लिए) |
मोबाइल फोन का क्या करें?
चुनाव आयोग के निर्देशों के मुताबिक मतदान केंद्र के अंदर मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति नहीं है। मतदान केंद्र के 100 मीटर के दायरे में फोन सिर्फ़ बंद (switched off) हालत में ही ले जाया जा सकता है। मतदाताओं की सुविधा के लिए केंद्र के प्रवेश द्वार के पास मोबाइल जमा करने की व्यवस्था की जाती है, जहां आप फोन बंद करके जमा कर सकते हैं और वोट डालने के बाद वापस ले सकते हैं। फिर भी, सबसे आसान यही है कि फोन घर पर छोड़ दें या साथ आए किसी व्यक्ति को दे दें।
मतदान केंद्र के अंदर क्या होता है? पूरी प्रक्रिया
पहली बार वोट डालने वालों के लिए यह हिस्सा सबसे काम का है। बूथ के अंदर की प्रक्रिया आम तौर पर इस क्रम में होती है:
- लाइन में लगें: पुरुषों और महिलाओं की अलग लाइन हो सकती है। बुज़ुर्गों, दिव्यांगों और गोद में बच्चा लिए महिलाओं को प्राथमिकता दी जाती है।
- पहला मतदान अधिकारी: यह सूची में आपका नाम और आपका पहचान पत्र जांचते हैं। यहां भाग संख्या और क्रम संख्या बताने से काम जल्दी होता है।
- दूसरा मतदान अधिकारी: यह आपकी बाईं तर्जनी उंगली पर अमिट स्याही लगाते हैं, रजिस्टर में आपके हस्ताक्षर या अंगूठे का निशान लेते हैं और आपको एक पर्ची देते हैं।
- तीसरा मतदान अधिकारी: यह आपसे पर्ची लेकर स्याही जांचते हैं और कंट्रोल यूनिट से EVM की बैलेट यूनिट चालू करते हैं।
- वोटिंग कंपार्टमेंट में: बैलेट यूनिट पर उम्मीदवारों के नाम और चुनाव चिन्ह होते हैं। जिस उम्मीदवार को वोट देना है, उसके सामने वाला नीला बटन दबाएं। उसके पास की लाल बत्ती जलेगी।
- VVPAT जांचें: बगल में रखी VVPAT मशीन की खिड़की में एक पर्ची कुछ सेकंड के लिए दिखेगी, जिस पर आपके चुने उम्मीदवार का नाम, क्रम संख्या और चुनाव चिन्ह होगा। इसके बाद पर्ची कटकर मशीन के बक्से में गिर जाती है।
- बीप की आवाज़: लंबी बीप की आवाज़ का मतलब है कि आपका वोट दर्ज हो गया।
किसी भी उम्मीदवार को वोट नहीं देना चाहते, तो बैलेट यूनिट पर सबसे आखिर में NOTA (इनमें से कोई नहीं) का बटन होता है।
अगर VVPAT में गलत पर्ची दिखे?
अगर आपको लगता है कि VVPAT पर्ची में वह उम्मीदवार नहीं दिखा जिसे आपने वोट दिया, तो तुरंत पीठासीन अधिकारी (Presiding Officer) को बताएं। इसके लिए एक तय प्रक्रिया है, जिसमें आपसे लिखित घोषणा ली जाती है और आपकी मौजूदगी में जांच वोट डलवाया जाता है। ध्यान रहे, अगर शिकायत गलत पाई जाती है, तो यह कानूनन दंडनीय है। इसलिए शिकायत तभी करें जब आपको पूरा यकीन हो।
अगर आपके नाम पर पहले ही कोई वोट डाल गया हो?
ऐसा होने पर पीठासीन अधिकारी को बताएं। अपनी पहचान साबित करने के बाद आप “टेंडर वोट” डाल सकते हैं। यह EVM में नहीं, बल्कि एक अलग बैलेट पेपर पर डाला जाता है और अलग से सुरक्षित रखा जाता है।
मतदान केंद्र पर कौन-कौन होता है?
बूथ के अंदर और बाहर कई लोग मौजूद रहते हैं। किससे क्या पूछना है, यह पता हो तो काम आसान हो जाता है।
| कौन | क्या काम करते हैं | कब उनसे बात करें |
|---|---|---|
| पीठासीन अधिकारी (Presiding Officer) | पूरे बूथ के प्रभारी | कोई शिकायत, नाम या पहचान से जुड़ा विवाद, VVPAT की दिक्कत |
| मतदान अधिकारी (Polling Officers) | नाम जांचना, स्याही लगाना, EVM चालू करना | प्रक्रिया से जुड़ा कोई सवाल |
| BLO | अक्सर बाहर सहायता के लिए मौजूद | भाग संख्या या क्रम संख्या पता नहीं हो |
| सुरक्षा कर्मी | व्यवस्था और सुरक्षा | भीड़, धमकी या गड़बड़ी |
| उम्मीदवारों के पोलिंग एजेंट | बूथ के अंदर बैठकर प्रक्रिया पर नज़र रखते हैं | इनसे आपको कुछ पूछने की ज़रूरत नहीं |
अगर बूथ पर कोई आपको वोट डालने से रोके, या आपसे गलत व्यवहार हो, तो सीधे पीठासीन अधिकारी से बात करें। वहां हल न निकले तो 1950 पर शिकायत करें।
मतदान के दिन आम तौर पर होने वाली परेशानियां और उनका हल
| परेशानी | हल |
|---|---|
| बूथ पर सूची में नाम नहीं मिल रहा | भाग संख्या दोबारा देखें, हो सकता है आप गलत कमरे में हों। सच में नाम न हो तो उस दिन वोट नहीं पड़ेगा, अगली बार के लिए फॉर्म 6 भरें |
| वोटर कार्ड की फोटो मेल नहीं खा रही | आधार या कोई दूसरा मान्य फोटो पहचान पत्र दिखाएं |
| नाम की स्पेलिंग में छोटी गलती है | अगर पहचान साफ़ हो रही है तो छोटी गलतियों को नज़रअंदाज़ करने के निर्देश हैं |
| बहुत लंबी लाइन | सुबह जल्दी या दोपहर बाद जाएं; बुज़ुर्गों और दिव्यांगों को प्राथमिकता मिलती है |
| EVM खराब होने से वोटिंग रुकी | मशीन बदली जाती है, थोड़ा इंतज़ार करें और लाइन न छोड़ें |
बुज़ुर्गों और दिव्यांग मतदाताओं के लिए सुविधाएं
- घर से वोटिंग: 85 साल से ज़्यादा उम्र के मतदाता और मतदाता सूची में दिव्यांग के रूप में दर्ज लोग घर से डाक मतपत्र के ज़रिये वोट डाल सकते हैं। इसके लिए चुनाव की अधिसूचना जारी होने के पांच दिन के अंदर फॉर्म 12D भरकर BLO के ज़रिये जमा करना होता है। जो यह सुविधा चुनते हैं, वे फिर मतदान केंद्र पर जाकर वोट नहीं डाल सकते।
- बूथ पर सुविधाएं: रैंप, व्हीलचेयर, पीने का पानी, छाया, शौचालय और कतार में बैठने के लिए बेंच जैसी न्यूनतम सुविधाएं हर मतदान केंद्र पर सुनिश्चित करने के निर्देश हैं।
- साथी की मदद: जो मतदाता देख नहीं सकते या शारीरिक रूप से बटन दबाने में असमर्थ हैं, वे 18 साल से ज़्यादा उम्र के एक साथी को अपने साथ वोटिंग कंपार्टमेंट तक ले जा सकते हैं। एक व्यक्ति एक दिन में एक से ज़्यादा मतदाता का साथी नहीं बन सकता।
- ब्रेल: EVM की बैलेट यूनिट पर ब्रेल लिपि में भी क्रम संख्या लिखी होती है।
- Saksham: ECINET ऐप के दिव्यांग (Saksham) विकल्प से पहले ही व्हीलचेयर जैसी मदद मांगी जा सकती है।
मतदान का समय और छुट्टी
- समय: 2027 के चुनाव में मतदान का समय अभी घोषित नहीं हुआ है (TBC)। आम तौर पर मतदान सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक होता है, लेकिन हर चुनाव के लिए आयोग अलग से समय घोषित करता है, और कुछ इलाकों में यह अलग भी हो सकता है।
- लाइन में हैं तो वोट पक्का: मतदान का समय खत्म होने के वक्त जो लोग लाइन में खड़े होते हैं, उन्हें वोट डालने दिया जाता है।
- वेतन सहित छुट्टी: लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 135B के तहत मतदान के दिन कर्मचारियों को वोट डालने के लिए वेतन सहित अवकाश का प्रावधान है। आपके दफ्तर पर यह कैसे लागू होगा, यह राज्य सरकार की अधिसूचना से तय होगा (TBC)।
वोटिंग के दिन की चेकलिस्ट
- [ ] बूथ का नाम और पता पता कर लिया।
- [ ] भाग संख्या और क्रम संख्या लिख ली।
- [ ] ओरिजिनल फोटो पहचान पत्र साथ है।
- [ ] मोबाइल घर पर छोड़ दिया, या बाहर जमा करने का ध्यान है।
- [ ] सुबह जल्दी जाने का प्लान बना लिया, ताकि दोपहर की भीड़ और धूप से बचें।
- [ ] घर के बुज़ुर्गों के साथ जाने की व्यवस्था कर ली।
मतदान केंद्र पर इन बातों से बचें
- बूथ के अंदर फोटो या वीडियो न लें। यह नियमों के खिलाफ है।
- किसी को यह न बताएं या दिखाएं कि आपने किसे वोट दिया। वोट की गोपनीयता कानूनन ज़रूरी है।
- मतदान केंद्र के आसपास किसी दल के पक्ष में प्रचार न करें।
- दो बार वोट डालने की कोशिश न करें। उंगली पर लगी स्याही इसी को रोकने के लिए है, और यह अपराध है।
आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत कैसे करें
अगर आपको मतदान से पहले या मतदान के दिन पैसे, शराब या तोहफे बांटे जाते दिखें, या धमकाया जा रहा हो, तो ECINET ऐप के cVIGIL हिस्से से फोटो या वीडियो के साथ शिकायत कर सकते हैं। 1950 पर कॉल करके भी शिकायत दर्ज की जा सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
क्या मैं किसी दूसरे बूथ पर वोट डाल सकता हूं? नहीं। वोट सिर्फ़ उसी बूथ पर पड़ेगा जिसकी सूची में आपका नाम है।
परिवार के सब लोगों का बूथ एक ही होगा? ज़्यादातर एक होता है, लेकिन बूथों के बंटवारे के बाद अलग भी हो सकता है। हर सदस्य का अलग से चेक करें।
बूथ बहुत दूर दिख रहा है, क्या बदलवा सकते हैं? बूथ आपके पते के हिसाब से तय होता है। अगर पता गलत दर्ज है, तो फॉर्म 8 से सही करवाएं। बूथ की दूरी से जुड़ी शिकायत अपने BLO या ज़िला निर्वाचन कार्यालय में करें।
वोटर स्लिप नहीं मिली तो क्या वोट नहीं डाल पाऊंगा? डाल पाएंगे। स्लिप ज़रूरी नहीं है। सूची में नाम और एक मान्य पहचान पत्र काफी है।
क्या वोटर स्लिप से वोट डाल सकते हैं? नहीं। स्लिप पहचान पत्र नहीं है। साथ में वोटर कार्ड या कोई दूसरा मान्य फोटो पहचान पत्र ले जाना ज़रूरी है।
उंगली पर स्याही किस उंगली पर लगती है? आम तौर पर बाएं हाथ की तर्जनी (पहली उंगली) पर।
क्या बूथ के अंदर बच्चे को साथ ले जा सकते हैं? छोटे बच्चे को गोद में लेकर जाने वाली माताओं को आम तौर पर अनुमति दी जाती है। इस बारे में अंतिम फैसला पीठासीन अधिकारी का होता है।
85 साल से ज़्यादा उम्र के दादाजी घर से वोट कैसे डालें? चुनाव की अधिसूचना के बाद पांच दिन के अंदर BLO के ज़रिये फॉर्म 12D जमा करें। मतदान दल घर आकर डाक मतपत्र से वोट डलवाएगा।
क्या वोट डालने के बाद VVPAT की पर्ची घर ले जा सकते हैं? नहीं। VVPAT की पर्ची सिर्फ़ खिड़की में कुछ सेकंड दिखती है और फिर मशीन के अंदर बंद बक्से में गिर जाती है। यह मतदाता को नहीं दी जाती।
मतदान केंद्र के बाहर कितनी दूरी तक प्रचार की मनाही है? चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक मतदान केंद्र के 100 मीटर के दायरे में चुनाव प्रचार की अनुमति नहीं है।
मतदान केंद्र पर गाड़ी से जा सकते हैं? आप अपनी गाड़ी से जा सकते हैं, लेकिन मतदान केंद्र के ठीक पास पार्किंग पर रोक हो सकती है। किसी उम्मीदवार या दल की ओर से मतदाताओं को लाने-ले जाने के लिए गाड़ी देना नियमों के खिलाफ है।
मदद के लिए किस नंबर पर कॉल करें? वोटर हेल्पलाइन 1950 (ज़िले के STD कोड के साथ) या टोल-फ्री 1800-11-1950।

