गणेश आरती व मंत्र: जय गणेश देवा आरती और गणपति के शक्तिशाली मंत्र (अर्थ सहित)

गणेश चतुर्थी 2026 (14 सितंबर) पर पूजा और आरती के समय गणपति के मंत्र और आरती का उच्चारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यहाँ प्रसिद्ध “जय गणेश जय गणेश देवा” आरती के पूरे बोल और गणपति के प्रमुख मंत्र अर्थ सहित दिए गए हैं।

गणेश आरती — जय गणेश जय गणेश देवा

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

एकदंत दयावंत चार भुजाधारी। माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी॥

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा। लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा॥

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

अंधन को आँख देत कोढ़िन को काया। बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया॥

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

‘सूर’ श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

गणपति के प्रमुख मंत्र

1. मूल (बीज) मंत्र

ॐ गं गणपतये नमः॥ यह गणेश जी का सबसे सरल और शक्तिशाली मंत्र है। किसी भी शुभ कार्य से पहले 108 बार जाप करना शुभ माना जाता है।

2. वक्रतुण्ड मंत्र

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ अर्थ: हे वक्र सूँड वाले, विशाल काय, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी देव! मेरे समस्त कार्यों को सदैव निर्विघ्न कीजिए।

3. गणेश गायत्री मंत्र

ॐ एकदन्ताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि। तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्॥ अर्थ: हम एकदंत को जानते हैं, वक्रतुण्ड का ध्यान करते हैं — वे गणेश हमें सन्मार्ग की प्रेरणा दें।

मंत्र जाप कैसे करें

  • स्नान कर स्वच्छ आसन पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  • रुद्राक्ष या तुलसी की माला से 108 बार जाप करें।
  • मन शांत रखें और श्रद्धा के साथ उच्चारण करें।
  • गणेश चतुर्थी के दिन मध्याह्न पूजा के समय जाप विशेष फलदायी माना जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. गणेश जी का मूल मंत्र क्या है? “ॐ गं गणपतये नमः” — यह गणपति का बीज मंत्र है।

Q. आरती कब करें? स्थापना के बाद प्रतिदिन सुबह और शाम, तथा विसर्जन से पहले अंतिम आरती करें।

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